छत्तीसगढ़ का मैदानी और पहाड़ी इलाका आज औद्योगिक प्रदूषण की भयावह चपेट में है। रायगढ़, कोरबा, रायपुर, सिलतरा, दुर्ग, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, गेरवानी, तराईमाल, पूंजीपथरा, तमनार, घरघोड़ा से लेकर सरगुजा और बस्तर तक उद्योगों से निकलने वाला खतरनाक दूषित जल, फ्लाइऐश (राख), ठोस कचरा और जहरीली हवा पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
सामाजिक कार्यकर्ता जयंत बहिदार ने आरोप लगाया है कि राज्य में औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार के पास कोई ठोस और प्रभावी योजना नहीं है। उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे वायु और जल प्रदूषण ने जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ पूरे प्राणी जगत को संकट में डाल दिया है।
कारखानों से निकलने वाली राख, धूल और धुएं से शहरों और गांवों के घर, स्कूल और अस्पताल कालिख से पट गए हैं। जैव विविधता को भारी क्षति पहुंची है, कई वनस्पतियां और सूक्ष्म जीव-जंतु विलुप्त हो चुके हैं। प्रदूषण के कारण कैंसर, फेफड़ा, किडनी सहित गंभीर बीमारियों से लोगों की मौत हो रही है। नदियां, नाले और तालाब दूषित हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला दूषित जल और फ्लाइऐश सीधे नदी-नालों के माध्यम से छत्तीसगढ़ और ओडिशा की जीवनरेखा महानदी में डाला जा रहा है, जिससे जल संपदा और जलीय जीवों की अनेक प्रजातियां नष्ट हो चुकी हैं, लेकिन सरकार इस पर खामोश बनी हुई है।
जयंत बहिदार का कहना है कि राज्य में उद्योग कंपनियां संविधान और कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही हैं। नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम कुछ हजार या लाख रुपये का जुर्माना लगाकर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है, जबकि लूट, शोषण, भ्रष्टाचार और प्रदूषण लगातार जारी है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा कि यूरोपीय देश नीदरलैंड (हालैंड) में टाटा स्टील प्लांट द्वारा वायु प्रदूषण बढ़ने पर सरकार ने 13 हजार करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया, क्योंकि वहां AQI और PM 2.5 के कड़े मानक लागू हैं। वहां कानून का पालन नहीं करने पर जेल और कारखाना नीलामी तक का प्रावधान है।
इसके विपरीत छत्तीसगढ़ और देश के कई हिस्सों में PM 2.5 का स्तर 400 के पार पहुंच चुका है, जिसे बेहद खतरनाक और जानलेवा माना जाता है, फिर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। इसी प्रदूषण के कारण देश में हर साल 17 लाख से अधिक लोगों की मौत हो रही है।
जयंत बहिदार ने सवाल उठाया कि “अंबानी, अडानी, जिंदल और वेदांता जैसे बड़े उद्योग समूहों के प्रदूषण के कहर से छत्तीसगढ़ को कौन बचाएगा?” उन्होंने कहा कि गैरकानूनी उद्योग संचालन से न सिर्फ जल-जंगल-जमीन की लूट हो रही है, बल्कि लाखों लोगों की जान जा रही है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों — आदिवासी, दलित, किसान-मजदूर, गरीब-पिछड़ा, पढ़े-लिखे वर्ग, न्यायपालिका, नेता और प्रशासन — से जागने और प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।
— जयंत बहिदार
(सामाजिक कार्यकर्ता)
मोबाइल: 8770014021

