105 देशी धान किस्मों के संरक्षण और पारंपरिक जवाफूल धान की खेती में उल्लेखनीय योगदान के लिए हुए सम्मानित
लैलूंगा। विकासखंड लैलूंगा के दूरस्थ ग्राम खैरबहाल के युवा किसान भवानी पंडा ने देशी धान की 105 किस्मों के संरक्षण और पारंपरिक जवाफूल धान की खेती के माध्यम से कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके इस कार्य के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट किसान सम्मान से सम्मानित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि से लैलूंगा क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
हरिभूमि एवं INH24 न्यूज़ के तत्वावधान में रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मान समारोह में भवानी पंडा को यह सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, हरिभूमि एवं INH24 न्यूज़ के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी तथा कृषि विभाग के प्रमुख सचिव परदेशी सिद्धार्थ कोमल के हाथों उन्हें शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
देशी धान की किस्मों के संरक्षण में अहम योगदान
भवानी पंडा द्वारा देशी धान की 105 किस्मों का संरक्षण और जवाफूल जैसे पारंपरिक धान की खेती करना कृषि की समृद्ध परंपरा को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। देशी धान की किस्में कृषि जैव विविधता और पारंपरिक खेती के ज्ञान की अनमोल धरोहर हैं। उनका संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों तक इस विरासत को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ग्राम खैरबहाल जैसे दूरस्थ गांव के युवा किसान की यह उपलब्धि अन्य किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। भवानी पंडा ने अपने परिश्रम, समर्पण और पारंपरिक कृषि के प्रति लगन से यह संदेश दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी नवाचार और निरंतर प्रयासों के माध्यम से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
उत्कल ब्राह्मण समाज ने दी बधाई
भवानी पंडा को मिले इस सम्मान पर क्षेत्रवासियों एवं उत्कल ब्राह्मण समाज ने उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने आशा व्यक्त की कि वे भविष्य में भी देशी धान की किस्मों के संरक्षण और पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करते रहेंगे तथा छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे।












