
छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत के दिग्गज निर्देशक भूपेन्द्र साहू और प्रेम चंद्राकर की सुपरहिट जोड़ी एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। बरसों का अनुभव और मिट्टी की सोंधी खुशबू समेटे, निर्माता अलख राय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मया दे दे मयारू-2’ आज पूरे प्रदेश के सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है।
वही जादू, वही एहसास लिए प्रेम-भूपेन्द्र की जोड़ी का कमबैक हो रहा है।फिल्म जगत में जब भी 'मया दे दे मया ले ले' और 'परदेसी के मया' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों का जिक्र होता है, तो भूपेन्द्र साहू का नाम सम्मान से लिया जाता है। रंगमंडल भारत भवन में खुद को तपाने वाले और संगीत नाटक अकादमी से जुड़े भूपेंद्र साहू ने इस बार भी अपनी जड़ों से जुड़ी कहानी पेश की है।
भूपेन्द्र साहू का मानना है कि "छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को उन्होंने जिया है जो अब ‘मया दे दे मयारू-2’ में दर्शकों को अपनापन महसूस होगा। वहीं उनका लक्ष्य उस बड़े दर्शक वर्ग को वापस सिनेमाघरों तक लाना है, जो पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ी फिल्मों से दूर हो गया था।"
🎵 सोशल मीडिया पर छाया 'मयारू' का जादू छाया हुआ है।
रिलीज से पहले ही फिल्म ने अपना दबदबा कायम कर लिया है। फिल्म के गाने यूट्यूब और सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहे हैं। युवाओं के बीच गानों की लोकप्रियता और फिल्म के आक्रामक प्रचार ने बाजार में जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यह फिल्म 'मोर छंइहा भुंईया' , परदेसी के मया, दईहान के दौर की यादें ताजा कर देगी।
🔍 इसकी खास बात यह है कि प्रेम चंद्राकर और भूपेन्द्र साहू के अनुभवी निर्देशन का दशकों पुराने तालमेल का सुखद परिणाम फिल्म में नजर आएगा ।
लोक संस्कृति और जमीनी हकीकत को दर्शाती ये एक ईमानदार फिल्म है। सिनेमा के प्रति संवेदनशील एवं समर्पित
निर्माता अलख राय ने फिल्म की भव्यता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया है जिससे यह फिल्म केवल एक खास वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ देखने लायक एक मुकम्मल पारिवारिक ड्रामा है।आज प्रदेश भर के सभी सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन होगा जिसको लेकर दर्शकों में अपार उत्साह देखा जा सकता है।



